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दिल्ली : पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर RSS का किया जिक्र तो भड़के पिनाराई विजयन, कहा- ‘स्वतंत्रता दिवस का अपमान’

New Delhi : 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से पीएम मोदी ने अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जिक्र किया था. यह पहली बार था कि प्रधानमंत्री ने लालकिले से संघ की तारीफ की और राष्ट्रनिर्माण में संघ के योगदान को सराहा. हालांकि इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है. विपक्ष ने इसे लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा है. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और स्वतंत्रता दिवस पर संघ की तारीफ को स्वतंत्रता दिवस का अपमान करार दिया. कांग्रेस भी आरएसएस के जिक्र पर नाराजगी जाहिर की है.
“भारतीय प्रधानमंत्री ने इस दिन की मूल भावना का अपमान किया”
पिनाराई विजयन ने एक बयान जारी कर कहा कि ‘गांधीजी की हत्या के बाद आरएसएस को प्रतिबंधित कर दिया गया था और राष्ट्रपिता की हत्या की साजिश रचने के लिए मुकदमे का सामना करने वाले वी.डी. सावरकर को भारत की आजादी का जनक बताने का प्रयास इतिहास को नकारने के अलावा और कुछ नहीं है. अंग्रेजों की सेवा करने वालों का महिमामंडन करने के लिए स्वतंत्रता दिवस को ही चुनना स्वतंत्रता संग्राम का जानबूझकर किया गया अपमान है. इस तरह के शर्मनाक कदम सांप्रदायिक संगठन आरएसएस की विभाजनकारी राजनीति की जहरीली विरासत पर पर्दा नहीं डाल सकते. स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का इस्तेमाल आरएसएस का महिमामंडन करने के लिए करके, भारतीय प्रधानमंत्री ने इस दिन की मूल भावना का अपमान किया है.’
पीएम मोदी ने आरएसएस को लेकर क्या कहा था?
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में कहा ‘आज गर्व के साथ मैं इस बात का जिक्र करना चाहता हूं कि 100 साल पहले एक संगठन आरएसएस का जन्म हुआ. 100 साल की राष्ट्र सेवा गौरवपूर्ण है. आरएसएस ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर 100 साल मां भारती के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया. सेवा, समर्पण, संगठन और अप्रतिम अनुशासन जिसकी पहचान रही है, ऐसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है.’
मोहन भागवत को खुश कर रहे हैं पीएम मोदी : जयराम रमेश
कांग्रेस ने इसे लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा ‘प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आरएसएस का जिक्र मोहन भागवत को खुश करने के लिए किया, क्योंकि मोदी अब पूरी तरह उनके भरोसे हैं. सितंबर के बाद जब वे 75 साल के हो जाएंगे, तो पद पर बने रहे के लिए मोहन भागवत की मदद पर निर्भर हैं.’
Ideal Express News