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दिल्ली : लोकसभा में मोदी सरकार पर बरसे राहुल गांधी, कहा- ‘सरकार के पास होनी चाहिए राजनीतिक इच्छाशक्ति’

New Delhi : लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा में राहुल गांधी ने हिस्सा लेते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर बरसे. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, ‘पहलगाम में एक क्रूर और निर्दयी हमला, जो साफ तौर पर पाकिस्तानी सरकार की ओर से प्रायोजित और षडयंत्र किया गया था. युवा और वृद्ध लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई. हम सभी ने इस सदन के प्रत्येक व्यक्ति ने मिलकर पाकिस्तान की निंदा की है.’ विपक्ष के नेता ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही विपक्ष सरकार और सेना के साथ था. विपक्ष के नाते हम एकजुट होकर सरकार के साथ थे. मैं करनाल में नरवाल के घर गया. मैंने उनका दुख महसूस किया. कानपुर में दूसरे परिवार से मिला. जब भी मैं सेना के किसी व्यक्ति से मिलने के दौरान हाथ मिलाता हूं तो मुझे पता लग जाता है कि यह टाइगर है. सेना का जवान देश के लिए लड़ने-मरने के लिए तैयार रहता है. सेना का प्रयोग करने से पहले सरकार के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति होनी चाहिए.
एक विपक्ष के रूप में हम एकजुट रहे : राहुल गांधी
राहुल ने कहा कि जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, बल्कि शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने, सभी दलों ने यह प्रतिबद्धता जताई कि हम सेना और भारत की निर्वाचित सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहेंगे. हमने उनके कुछ नेताओं की ओर से कुछ व्यंग्यात्मक टिप्पणियां सुनीं, लेकिन हमने कुछ नहीं कहा. यह एक ऐसी बात थी, जिस पर इंडिया गठबंधन के सभी वरिष्ठ नेतृत्व सहमत थे. हमें बहुत गर्व है कि एक विपक्ष के रूप में हम एकजुट रहे, जैसा कि हमें होना चाहिए था.
1971 में राजनीतिक इच्छाशक्ति थी : राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा, ‘…दो शब्द हैं- ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ और ‘संचालन की स्वतंत्रता’. यदि आप भारतीय सशस्त्र बलों का उपयोग करना चाहते हैं तो आपके पास 100% राजनीतिक इच्छाशक्ति और संचालन की पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए. कल राजनाथ सिंह ने 1971 और सिंदूर की तुलना की. मैं उन्हें याद दिलाना चाहूंगा कि 1971 में राजनीतिक इच्छाशक्ति थी. सातवां बेड़ा हिंद महासागर के रास्ते भारत की ओर आ रहा था. तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें बांग्लादेश के साथ जो करना है, करना होगा, जहां भी आना है आओ… इंदिरा गांधी ने जनरल मानेकशॉ से कहा कि 6 महीने, 1 साल, जितना भी समय आपको चाहिए, ले लीजिए क्योंकि आपको कार्रवाई की, युद्धाभ्यास की स्वतंत्रता होनी चाहिए. एक लाख पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और एक नया देश बना.’
‘…अगर आपने मेरी बात सुनी होती, तो आप वो 5 विमान नहीं खोते.’
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने एक और बहुत महत्वपूर्ण बात कही, हो सकता है कि उनका यह कहने का इरादा न रहा हो. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पाकिस्तानियों से कहा कि हम आपके किसी भी सैन्य ढांचे पर हमला नहीं करेंगे. मैंने युद्धाभ्यास की स्वतंत्रता की बात कही, वायु सेना को स्वतंत्रता की बात कही. इंडोनेशिया के रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन शिव कुमार ने कहा कि मैं उनसे सहमत नहीं हो सकता कि भारत ने इतने सारे विमान खो दिए, लेकिन मैं इस बात से सहमत हूं कि हमने कुछ विमान खो दिए. यह केवल राजनीतिक नेतृत्व द्वारा सैन्य प्रतिष्ठान और उनकी वायु रक्षा पर हमला न करने के लिए दिए गए प्रतिबंध के कारण हुआ. आप पाकिस्तान में गए, आपने पाकिस्तान पर हमला किया और आपने हमारे पायलटों से कहा – उनकी वायु रक्षा प्रणाली पर हमला न करें. राहुल गांधी ने कहा, ‘…अगर आपने मेरी बात सुनी होती, तो आप वो 5 विमान नहीं खोते.’ उन्होंने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने 11 मई को एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि जब डीजीएमओ स्तर की वार्ता चल रही थी, तो पाकिस्तान ने वास्तव में कहा था कि हमें पता है कि फलां विमान कार्रवाई के लिए तैयार है. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप उसे वापस बुला लें. उन्होंने ऐसा कहा है, तो यह बिल्कुल स्पष्ट है कि उन्हें चीन से युद्ध की जानकारी मिल रही थी.
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