Big accident: राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में दर्दनाक हादसा हुआ. एक सरकारी स्कूल की बिल्डिंग की छत अचानक गिर गई, जिसमें 7 बच्चों की दर्दनाथ मौत हो गयी. इस घटना में करीब 20 से अधिक बच्चे मलबे में दबे होने का अनुमान है. राहत कार्य जारी है. हादसे के बाद राजस्थान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये हैं. बताया जा रहा है कि स्कूल की छत जर्जर हो चुकी थी. लगातार हो रही भारी बारिश के बाद छत के गिरने का अंदेशा भी बना हुआ था. इसी बीच ये हादसा हो गया. हादसे में गंभीर रूप से घायल बच्चों को झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है. वहीं झालावाड़ में बच्चों की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख प्रकट किया है. ट्वीट के माध्यम से पीएम ने कहा, ‘दुर्घटना अत्यंत दुःखद है. इस कठिन घड़ी में मेरी संवेदनाएं प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के साथ हैं. मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं.
सीएम ने जताया दुख, जांच के दिये आदेश
हादसे पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिवंगत दिव्य आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की. साथ ही उन्होंने हादसे की जांच के निर्देश भी दिए हैं. वहीं राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने हादसे पर दुख जाताया है. उन्होंने लिखा- “पीपलोदी, मनोहरथाना के स्कूल भवन में हुआ हादसा अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक है. जनहानि और कई बच्चों के घायल होने का समाचार हृदयविदारक है. ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत मासूम आत्माओं को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति दें. घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करती हूं.” वहीं घटना पर दुख जताते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, “झालावाड़ के मनोहरथाना में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने की खबर आ रही है, जिसमें कई बच्चे और शिक्षक हताहत हुए हैं. मैं ईश्वर से कम से कम जनहानि और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ.”
मौत के लिए सरकारी तंत्र जिम्मेदार : डोटासरा
दर्दनाक हादसे पर पर दुख जताते हुए डोटासरा ने राज्य की बीजेपी सरकार को निशाने पर लिया. उन्होंने सिस्टम की लापरवाही को हादसे का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि मासूमों की जान सिर्फ लापरवाही की वजह से गई है. मां-बाप से बहुत सपने देखकर बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए स्कूल भेजा होगा लेकिन सरकारी तंत्र इतना लापरवाह हो गया कि यह संज्ञान नहीं ले सका कि ये भवन बच्चों के सुरक्षित है कि नहीं. हमें इस घटना से सीख लेकर जिम्मेदारी जरूर लेनी चाहिए.