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आज भारत बंद : बंद का दिखा मिला-जुला असर, मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ श्रमिक संगठनों ने खोला मोर्चा

New Delhi : देश की दस बड़ी श्रमिक और किसान संगठनों के आह्वान पर आज भारत बंद बुलाया गया है. बंद के कारण बैंक, परिवहन समेत कई सेवाओं पर मिला-जुला असर देखा जा रहा है. देशव्यापी हड़ताल 10 श्रमिक संगठनों और उनकी सहयोगी इकाइयों की ओर से की जा रही है. इन संगठनों का कहना है कि भारत बंद केंद्र सरकार की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ बुलाई गई है.

रांची में प्रदर्शन

झारखंड में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रव्यापी ‘भारत बंद’ के दौरान रांची में सीएमपीडीआई मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

मिदनापुर में वामपंथी ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता का प्रदर्शन, हिरासत में लिए गये

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में वाहनों को रोकने की कोशिश कर रहे वामपंथी ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. केंद्रीय और क्षेत्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़े 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी नये श्रम कानून और निजीकरण का विरोध कर रहे हैं. 26,000 रुपये का न्यूनतम वेतन और पुरानी पेंशन योजना जैसी मांगों को लेकर देश भर में हड़ताल पर जाने की घोषणा की है.

कुरुक्षेत्र में हड़ताल का रोडवेज पर आंशिक असर

ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आज राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले की परिवहन सेवाओं पर आंशिक असर दिखाई दिया. दर्जनों बसें विभिन्न रूटों के लिए पुलिस लाइन से भी निकाली गई. प्रशासन दर्जनों बसों को रूटों पर उतरने में सफल रहा.

कोलकाता में यूनियनों के कार्यकर्ता और पुलिस के बीच बहस

कोलकाता में वामपंथी दलों के यूनियनों के कार्यकर्ताओं और कोलकाता पुलिस के बीच जुबानी जंग छिड़ गई. 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है और आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ऐसे आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है जो श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं. कोलकाता में ‘भारत बंद’ रैली के दौरान वामपंथी दलों के यूनियनों के कार्यकर्ताओं को कोलकाता पुलिस जहां-तहां हटाती रही.

केरल में बंद का दिखा असर

केरल में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की तरफ से बुलाए गए ‘भारत बंद’ के समर्थन में कोट्टायम में दुकानें और शॉपिंग मॉल बंद रहे. वहीं केरल के कोच्चि में सड़कें खाली रहीं. यूनियनों ने केंद्र सरकार पर “कॉर्पोरेट समर्थक” नीतियों को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया. ट्रेड यूनियनों की तरफ से बुलाए गए 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से बुधवार को केरल में जनजीवन पूरी तरह ठप्प हो गया. मंगलवार मध्यरात्रि से शुरू हुई इस हड़ताल को माकपा शासित राज्य में ट्रेड यूनियनों और वामपंथी संगठनों का जबरदस्त समर्थन मिला है.

श्रमिक संगठनों की मुख्य मांगें

– सरकार पिछले 10 वर्षों से वार्षिक श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं कर रही
– चार नई श्रम संहिताएं लागू कर सरकार श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर रही
– सामूहिक सौदेबाजी, हड़ताल के अधिकार, और श्रम कानूनों का उल्लंघन मजदूरों के लिए घातक
– नौकरियों की कमी, मंहगाई और मजदूरी में गिरावट जैसे मुद्दे बढ़ते जा रहे हैं
– निजीकरण, आउटसोर्सिंग, और ठेकेदारी प्रणाली को बढ़ावा दे रही है
– सेवानिवृत्त कर्मियों को पुनर्नियुक्ति दे रही है जबकि देश की 65 फीसदी जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है
– ईएलआई (रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना जैसे कार्यक्रमों के ज़रिये नियोक्ताओं को फायदा पहुंचा रही है

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