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हड़ताल : कल भारत बंद का आह्वान, 10 श्रमिक संगठनों ने बंद का किया ऐलान, मोदी सरकार की नीतियों का विरोध

New Delhi : कल यानी 9 जुलाई 2025 को भारत बंद का ऐलान किया गया है. देशव्यापी हड़ताल 10 श्रमिक संगठनों और उनकी सहयोगी इकाइयों की ओर से की जा रही है. इन संगठनों का कहना है कि भारत बंद केंद्र सरकार की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ बुलाई गई है. भारत बंद में बैंकिंग, बीमा, कोयला खनन, राजमार्ग, निर्माण और अन्य कई क्षेत्रों में कार्यरत 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी शामिल होंगे. हड़ताल के कारण बैंकिंग, डाक सेवाएं, कोयला खनन, राज्य परिवहन, फैक्ट्रियां और अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.

श्रमिक संगठनों की मुख्य मांगें

– सरकार पिछले 10 वर्षों से वार्षिक श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं कर रही
– चार नई श्रम संहिताएं लागू कर सरकार श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर रही
– सामूहिक सौदेबाजी, हड़ताल के अधिकार, और श्रम कानूनों का उल्लंघन मजदूरों के लिए घातक
– नौकरियों की कमी, मंहगाई और मजदूरी में गिरावट जैसे मुद्दे बढ़ते जा रहे हैं
– निजीकरण, आउटसोर्सिंग, और ठेकेदारी प्रणाली को बढ़ावा दे रही है
– सेवानिवृत्त कर्मियों को पुनर्नियुक्ति दे रही है जबकि देश की 65 फीसदी जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है
– ईएलआई (रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना जैसे कार्यक्रमों के ज़रिये नियोक्ताओं को फायदा पहुंचा रही है

श्रमिक संगठन पहले भी कर चुकी है हड़ताल

इससे पहले श्रमिक संगठनों ने 26 नवंबर 2020, 28-29 मार्च 2022, 16 फरवरी 2024 को भी देशव्यापी हड़तालें की थीं. 9 जुलाई को प्रस्तावित यह आम हड़ताल सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की नीतियों और श्रमिक अधिकारों पर सवाल उठाने की एक बड़ी कोशिश है. अगर यह हड़ताल सफल रही, तो इसका असर न केवल सेवाओं पर, बल्कि सरकार की नीतियों पर भी पड़ सकता है.

Ideal Express News