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कोलकाता : अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए कोलकाता नगर निगम की नई पहल, नया सर्वेक्षण मॉड्यूल शुरू

Kolkata : कोलकाता शहर में ज़मीन और नगर निगम की संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए कोलकाता नगर निगम ने इस बार विशेष पहल की है. ई-केएमसी 2.0 परियोजना के तहत 1 सितंबर से नया सर्वेक्षण मॉड्यूल शुरू किया जा रहा है. नगर निगम अधिकारियों को उम्मीद है कि यह मॉड्यूल अवैध अतिक्रमण की पहचान करने और प्रशासनिक कार्रवाई करने में एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है. नगर निगम सूत्रों के अनुसार, अब तक किसी भी ज़मीन का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद भी अगर अवैध अतिक्रमण का पता चलता था, तो उसका पंजीकरण, उसके बाद की प्रशासनिक प्रक्रिया और शुल्क वसूली की प्रक्रिया में काफ़ी समय लगता था. नए सर्वेक्षण मॉड्यूल में एक अलग प्रणाली है, जिसके ज़रिए निरीक्षण के दौरान अगर अवैध अतिक्रमण की पहचान होती है, तो उसका तुरंत पंजीकरण किया जाएगा. नतीजतन, पूरी प्रक्रिया काफ़ी तेज़ और पारदर्शी होगी.
ऑनलाइन पोर्टल की भी सुविधा होगी उपलब्ध
सिर्फ़ अवैध अतिक्रमण ही नहीं, इस डिजिटल मॉड्यूल के ज़रिए कई ज़रूरी काम भी एक साथ किए जा सकेंगे. नगर निगम सूत्रों के अनुसार, इस बार ज़मीन रिकॉर्ड प्रबंधन, लीज़ या लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज़ों का भंडारण, भवन योजना अनुमोदन के दौरान सर्वेक्षण अवलोकन रिपोर्ट (एसओआर) तैयार करना और यहाँ तक कि विकास शुल्क वसूली भी एक ही प्लेटफ़ॉर्म से की जा सकेगी. एसओआर ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी तैयार किया जा सकेगा. विकास शुल्क के भुगतान के लिए ऑनलाइन पोर्टल और सामान्य संग्रह केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध होगी.
सर्वेक्षण मांग रिपोर्ट में क्यूआर कोड भी जोड़े जा रहे
नगरपालिका के अधिकारियों के अनुसार, नए मॉड्यूल का एक लाभ ‘नियंत्रण संख्या’ और ‘अधिभोगी संख्या’ के आधार पर अभिलेखों का संग्रहण है. परिणामस्वरूप, किस भूमि या संपत्ति पर किसका कब्ज़ा है, कहाँ पट्टा या लाइसेंस दिया गया है, कहाँ अवैध कब्ज़ा हुआ है, यह सारी जानकारी एक साथ आसानी से उपलब्ध हो जाएगी. इसके अलावा, विभिन्न प्रकार की रिपोर्ट तैयार की जा सकेंगी ताकि शीर्ष अधिकारी नीति निर्माण और कार्यान्वयन की निगरानी कर सकें. विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस बार सर्वेक्षण मांग रिपोर्ट में क्यूआर कोड जोड़े जा रहे हैं, जिससे जानकारी की प्रामाणिकता की जाँच आसान हो जाएगी.
प्रशासनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम
नगरपालिका का दावा है कि इस मॉड्यूल के लागू होने से नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा. अवैध अतिक्रमण से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान हो सकेगा. प्रशासनिक पारदर्शिता भी कई गुना बढ़ जाएगी. एक अधिकारी ने बताया, “अब तक जमीनी स्तर पर दर्ज की जाने वाली कई शिकायतें समय पर दर्ज नहीं की जाती थीं. अब से, जानकारी तुरंत सिस्टम में दर्ज कर दी जाएगी. इससे अतिक्रमणकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी.” नगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से शहर का भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगा. साथ ही, नागरिक सेवाएँ डिजिटल माध्यमों से और तेज़ी से उपलब्ध होंगी, जो कोलकाता नगर पालिका के प्रशासनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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