Ranchi : दिशोम गुरू शिबू सोरेन को आमलोगों से लेकर गणमान्य लोग श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं. भाजपा के राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने गुरूजी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन झारखंडी अस्मिता, आदिवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित था. उनका योगदान झारखंड आंदोलन और देश की राजनीति में अमूल्य है. दीपक प्रकाश ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शोकाकुल परिजनों से मिलकर संवेदना प्रकट की. उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु का विचार और जीवन दर्शन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा.
झामुमो विधायक विकास सिंह मुंडा ने व्यक्त की गहरी संवेदना
झामुमो विधायक विकास सिंह मुंडा ने गुरूजी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि गुरुजी का निधन झारखंड की राजनीति, आदिवासी समाज और सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए एक अपूरणीय क्षति है. विकास सिंह मुंडा ने कहा कि दिशोम गुरु का जीवन संघर्ष, सिद्धांत और सेवा का प्रतीक था. उन्होंने झारखंड आंदोलन को मजबूत आधार और दिशा दी. उनके कारण आज यह राज्य अस्तित्व में है. उनका आदिवासी हितों के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा. उन्होंने कहा कि गुरुजी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे. उनके विचार और संघर्ष सदैव हमें मार्ग दिखाता रहेगा.
देवेंद्रनाथ महतो हुए भावुक
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर आंदोलनकारी देवेंद्रनाथ महतो भावुक हो गये. कहा कि उनकी प्रेरणा आज भी जीवन में संबल देती है. आंदोलनकारी सह झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो ने आइडियल एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में उन्होंने शिबू सोरेन के साथ बिताए गए पलो को याद करते हुए भावुकता भरे शब्दों में गुरुजी को याद किया. देवेंद्रनाथ महतो ने बताया कि जब वह छात्र आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, तब उनकी गुरुजी से मुलाकात हुई थी. मैंने अपने मन की बातें उनसे साझा कीं. संघर्षों की थकान और भविष्य को लेकर चिंता थी. तब गुरुजी ने बड़े ही स्नेह से कहा था ‘बाबू, घबराओ नहीं एक आंदोलनकारी का जीवन संघर्षों से भरा होता है. हमने भी तुम्हारी तरह कठिन रास्तों से गुजरकर आज यह मुकाम पाया है. तुम अच्छा कर रहे हो, आगे बढ़ो.’ उनके ये शब्द आज भी मेरे जीवन के लिए प्रेरणा हैं. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन न केवल झारखंड आंदोलन के नेता थे, बल्कि एक विचारधारा और संघर्षशील नेतृत्व के प्रतीक थे. उनका जीवन आदिवासी समाज के हक और सम्मान के लिए समर्पित था.