सौरभ राय, रिपोर्टर, आइडियल एक्सप्रेस
Ranchi : पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास झारखंड में इन दिनों राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है. मुद्दा चुना है पेसा कानून को. रघुवर दास ने पेसा कानून को लेकर मुहिम चला रहे हैं. इसके बाद पेसा कानून को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग छिड़ गयी. क्योंकि झारखंड में पेसा कानून एक अहम मुद्दा है. दरअसल पिछले कुछ दिनों से पेसा कानून के मुद्दे को लेकर रघुवर दास आदिवासी समाज के बीच जाकर जन चौपाल लगा रहे हैं. इस दौरान उनके निशाने पर राज्य की हेमंत सरकार रहती है. पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि आदिवासी समाज को समर्पित पेसा कानून जल्द से जल्द राज्य में लागू हो ताकि झारखंड की प्राकृतिक, सांस्कृतिक पहचान मिटे नहीं.

कांग्रेस ने रघुवर दास पर किया पलटवार
वहीं कांग्रेस विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने रघुवर दास पर पलटवार किया है. कहा कि भारतीय जनता पार्टी सबसे अधिक बार झारखंड के सता में रही लेकिन आज तक पेसा कानून लागू नहीं कर पाई. सिर्फ बड़े घराने के लोगों को फायदा पहुंचाने का काम किया. नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि आदिवासी समाज को कैसे बांटा जाए, उस पर भाजपा के नेता काम कर रहे हैं. सिर्फ बरगलाने के लिए. जहां तक बात है पेसा कानून की तो इसे लेकर राज्य सरकार गंभीर है. इस पर काम भी हो रहा है. जल्द ही आदिवासी समाज के लिए बेहतर पेसा नियमावली तैयार कर पेश की जाएगी.
पेसा कानून आदिवासी समाज के लिए जरूरी : सन्नी टोप्पो
दूसरी ओर आदिवासी समाज से ताल्लुक रखने वाले सन्नी टोप्पो ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समाज के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इससे ग्राम सभा को मजबूती मिलती है. पेसा कानून से आदिवासी समाज की संस्कृति और पर्यावरण को सुरक्षा मिलेगी. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की पहल सहरानीय है. राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को इसे लागू करना चाहिए.
पेसा कानून पर नहीं हो राजनीति : अजय तिर्की
वहीं केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि पेसा कानून निश्चित तौर पर आदिवासी समाज के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. जिस प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जन चौपाल लगा रहे हैं, यह महज एक आईवॉश है. उन्होंने पूछा कि रघुवर दास ने अपने कार्यकाल में आदिवासी समाज के लिए क्या किया. अजय तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पेसा कानून के मुद्दे पर सार्थक चर्चा करना चाहिए. इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर अपनी बात रखनी चाहिए तभी समस्या का हल निकलेगा. अजय तिर्की ने कहा कि वर्तमान हेमंत सरकार आदिवासी के हित के लिए ही है.
पेसा कानून है क्या?
पेसा कानून, या पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996, भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक कानून है जो अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन सुनिश्चित करता है. इसका मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों को स्वशासन का अधिकार देना और उनकी सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना है.
















