जिनेवा: ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा- “अगर अमेरिका इजराइल के साथ युद्ध में सक्रिय तौर पर शामिल होता है तो यह ‘सभी के लिए बेहद खतरनाक’ होगा.” अराघची ने यह बात जिनेवा से वार्ता के बाद लौटते समय इस्तांबुल में पत्रकारों से बातचीत में कही. हालांकि इस बातचीत में कोई कूटनीतिक सफलता नहीं मिल सकी. वार्ता खत्मस होने पर अराघची ने कहा कि वह आगे की बातचीत के लिए तैयार हैं. लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल की तरफ से हमले जारी रहने के बीच तेहरान को अमेरिका के साथ बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं है.
जिनेवा में कूटनीतिक वार्ता विफल
बता दें कि इजरायल और ईरान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से जिनेवा में घंटों चली कूटनीतिक वार्ता विफल हो गई है. यूरोपियन मंत्रियों और ईरान के शीर्ष राजनयिकों के बीच शुक्रवार को जेनेवा में चार घंटे तक बैठक हुई. ठीक इसी समय राष्ट्रवपति ट्रंप युद्ध में अमेरिकी सेना को उतारने पर विचार कर रहे थे जिससे परमाणु रिएक्टरों पर संभावित हमलों को लेकर चिंताएं बढ़ गई.
आगे भी वार्ता के लिए तैयार : अब्बास अरागची
अब्बास अरागची ने कहा है कि कि वह आगे भी वार्ता के लिए तैयार हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल की ओर से लगातार हमले किए जाने के कारण ईरान को अमेरिका के साथ वार्ता करने में कोई रुचि नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यदि हमले बंद हो जाएं और हमलावर को उसके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए तो ईरान कूटनीतिक कदमों पर विचार करने के लिए तैयार है.’ वार्ता के लिए कोई अगली तारीख तय नहीं की गई है.
इजराइल सैन्य अभियान जारी रखेगा : बेंजामिन नेतन्याहू
वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- “जब तक उनका देश चाहेगा तब तक ईरान में इजरायल का सैन्य अभियान चलेगा. इसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों को खत्म करना है. इजरायल के एक टॉप जनरल ने भी इसी तरह की चेतावनी देते हुए कहा कि इजरायली सेना लंबे अभियान के लिए तैयार है. वहीं ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के खिलाफ इजराइल के अभियान में अमेरिका के शामिल होने को लेकर दो सप्ताह में फैसला लेंगे.
13 जून को इजराइल के हमले के बाद छिड़ गया था युद्ध
बता दें कि इजराइल ने 13 जून को ईरान परमाणु और सैन्य ठिकानों, शीर्ष जनरलों और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाकर हमले किए थे. इसके जवाब में ईरान की ओर से हवाई हमले किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ गया था. वाशिंगटन स्थित ईरानी मानवाधिकार समूह के अनुसार, ईरान में 263 आम नागरिकों समेत कम से कम 657 लोग मारे गए हैं और 2,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इजरायली सेना के अनुमान के अनुसार, ईरान ने इजराइल पर 450 मिसाइलें और 1,000 ड्रोन दागकर जवाबी कार्रवाई की है. सेना के अनुसार, अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को इजरायल की मल्टीी लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्ट म ने ढेर कर दिया है. इन हमलों में इजरायल में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हैं.

















